बच्चो का गुस्सा कैसे कंट्रोल करे कुछ उपाय – How to Deal with an Angry Child

How to Deal with an Angry Childगुस्सा एक प्रकार से common emotion है, जो व्यक्ति के अंदर रहता है। यह एक negative emotion है जिस में guilty feeling, आक्रोष, jealousy आदि बहुत कुछ शामिल होता है। जब किसी को गुस्सा आता है तो उसके positive emotion लगभग समाप्त हो जाते है।

Chinese meditation में गुस्से को liver से जोड़ा गया है।जब आप को liver की बीमारी होती है, तो आप excited और चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते हैं लेकिन आज के बदलते समय में इस nagetiv emotion का असर कुछ अधिक दिखाई पड़ने लगा है। गुस्से में व्यक्ति सही गलत समझने की शक्ति खो देता है। कई बार तो गुस्से में लोग गलत काम भी कर बैठते हैं और जब उन्हें महसूस होता है तब पछताने के सिवा उन के पास कोई रास्ता नहीं रह जाता।

अगर बच्चों की बात करें तो पेरेंटस तुरंत ये कह देते हैं बच्चों में बहुत गुस्सा भरा हुआ है। आज के बच्चे normal तरीके से अपने parents से ऐसे बातचीत करते हैं जैसे गुस्से में हों,जबकि ऐसा होता नहीं। अब दोस्ती का वातावरण आ चुका है। बच्चों और माता पिता के बीच की दूरी कम हो चुकी है। नौर्मल बातचीत में भी वे एक-दूसरे को धक्का मारते है। ऐसा नहीं है कि वे माता पिता को प्यार या सम्मान नहीं करते। तो आज यही बात करते हैं बच्चों को जब गुस्सा आए तो क्या करना चाहिए …

Advertisement

खुद को  शांत रखना है

सबसे पहले तो अपना behavior देखना है। अपने आप को शांत रखना है। जब बच्चा बहुत गुस्सा कर रहा है या चिल्ला रहा है तो पेरेंटस को शांत रहना है।

बच्चो का गुस्सा कैसे कंट्रोल करे कुछ उपाय

Vocabulary अच्छी रखनी है

बच्चों को जब गुस्सा आए तो Vocabulary अच्छी रखनी है और अच्छे शब्दों का यूज करना है, जैसा कि बच्चे को गुस्सा आया तो बडे चिल्ला पडते हैं  कि  पागल बना दिया तूने मुझे…देख रही हूं बहुत बत्तमीज हो गया है…  ये नही बोलना।

Advertisement

इसी बीच आप को से ये जानना है कि गुस्सा आ किस लिए रहा है। तबियत ठीक नही है, इस वजह से चिडचिडा हो गया है या और कुछ बात है। कोई मेहमान तो ऐसा नही आ गया जिसकी वजह से वो बोर महसूस कर रहा है।

बात की गहराई तक जाना है

पहले बात की गहराई तक जाना चाहिए  फिर पूछना चाहिए कि क्या हुआ..वैसे तो पेरेंटस को पता ही होता है पर कई बार समझ नही आ रहा हो तो पूछ लीजिए, पर सीआईडी या पुलिस की तरह नही … बल्कि एक अच्छे पापा या मम्मी  की तरह।

बच्चे को अपने पास बुला कर गले लगाना है और प्यार से सिर पर हाथ फेरते हुए उससे पूछना है कि क्या हुआ है ये तो बताओ… इससे हमारी बच्चों के प्रति बोंडिग हार्मोंस बनते हैं और बच्चा stress free होता है.. ये बहुत जरुरी होता है।

Advertisement

अगर पेरेंटस की गलती है तो बच्चे को सॉरी बोलने में कोई दिक़्कत नहीं होनी चाहिए। बच्चों के आगे झुक कर हम छोटे नही हो जाएगे, बल्कि हमारा प्यार और बढेगा। हम पेरेंटस promise तो करते हैं पर उसे पूरा नही कर पाते, शाम को जल्दी आने की बात तो करते हैं पर जल्दी नही आते तो बच्चा गुस्सा तो करेगा ही।

 

Environment बदलने से

बच्चों का ध्यान बटांना चाहिए, जिस जगह वो है वहां से कही और लेकर जाइये। कई बार environment  बदलने से बहुत फर्क पडता है,  उसके बहुत तरीके हैं  जैसे…

Advertisement

बच्चों को लालच भी नही देना चाहिए कि चलो मार्किट से ये खरीद लाओ, चलो आप चाकलेट ले लो, फिर तो बच्चे को समझ आ ही जाएगा कि ऐसा करने से उसे सब कुछ मिल जाएगा तो कई बार जानबूझ कर भी वो एक्टिंग करेगा।

गेम्स बनाकर

अलग अलग गेम्स बनाकर भी बच्चे के गुस्से को काबू किया जा सकता है, जैसे : जब उनको गुस्सा आए तो कुछ Activities करवा सकते हैं।

एक बाक्स बना लो उसका नाम एंगर बॉक्स रख दें और उसमे कुछ मजेदार बातें लिख दें फिर उसका यूज़ करे, जब बच्चा गुस्सा हो जैसे :  शीशे मे खुद को देखो और स्माईल करो या खुद को देखते हुए दस तक गिनती करो.. पानी पी कर आओ.. अपने बेस्ट फ्रेंड को फोन करो.. आपका सबसे अच्छा कार्टून कौन सा है वो क्यों अच्छा लगता है… 

Advertisement

कई पेरेंट्स गुब्बारा भी फुलाने को कहते हैं कि गुस्सा आ रहा है तो गुबारा फुलाओ अब गुस्सा गुब्बारे में चला गया अब या तो गुब्बारा फोड दो या आराम से हवा निकाल दो और गुस्सा ठीक हो जाएगा..

कुछ लोग कार्डस बना लेते हैं कि जब गुस्सा आ रहा हो एक कार्ड उठाओ उस पर कुछ भी मजेदार लिखा होगा…

कई बार कुछ पेरेंटस बच्चे को बोलते हैं कि कुछ भी लिखो या ड्राईंग करो और फिर जब हो जाती है तो उसे फाड दो…

Advertisement

प्रेरणास्रोत हमे खुद बनना है Set a good example role model

बातें बहुत सारी हैं जरुरत इस बात की है कि Set a good example बच्चे को समझे और उसे समय दे पर सजा देना, गुस्सा करना, या टीवी बंद कर देना कि आज से नही देखोगे यही सजा है…