छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर कैसे अलर्ट रहें 

छोटे बच्चों की सुरक्षाअक्सर  पेरेंट्स छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित रहते हैं और स्वाभाविक भी है। बड़े बच्चे तो समझदार हो जाते हैं, पर छोटे बच्चों बहुत मासूम होते हैं इसलिए पेरेंट्स को उनकी सेफ्टी को लेकर बहुत चिंता रहती है। तो क्या चिंता होनी चाहिए या चिंता करने की बजाय हमें उपाय खोजने चाहिए। कल कुछ रेलेटिवस शैफाली, पलक, रुचि से मिलना हुआ। इन सभी के बच्चे बहुत छोटे हैं और ये चिंतित भी थी, पर आपस में डिस्कस भी कर रही थी कि क्या करना चाहिए। उनकी बातों से कुछ बहुत अच्छे पोईंटस  उभर कर आए।

तो वो मैं आपसे शेयर कर रही हूं…

स्ट्रांग बनाइये

सबसे पहले तो पेरेंट्स को बच्चों को स्ट्रांग रहने की शिक्षा देनी चाहिए। बच्चों को ज्यादा छुई मुई या डेली केट नही बनाना चाहिए पर ममाज boy भी नही बनाना चाहिए। पेरेंट्स को बताना चाहिए कि अगर कभी कोई अजनबी, धीरे से इशारा कर उसे चॉकलेट, या अन्य खाने पीने की वस्तुओं का लालच देकर बुलाए तो मना कर देना चाहिए।

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बच्चों को न कहना सिखायें “No”

बच्चों को बताए कि ना कहें। कोई कितना भी लालच दे, अपने पास बुलाए पर आप को ना कहना है और फिर भी जबरदस्ती करे तो चिल्लाना है और वहां से भाग जाना है और जहां ज्यादा लोग हों वहां चले जाना है। 

सीक्रेट जरुर बताएं

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अगर कोई अजनबी या जानकार बच्चे को कोई बात मम्मी पपा को बताने के लिए मना करे तो वो बात जरुर बताए।  इसे बिल्कुल नही छुपाना चाहिए।

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बच्चों को confident बनाए

बच्चे को बचपन से ही confident बनाए। किस से कैसे बात करनी है, कैसे नही इसकी ट्रेनिंग भी दें, क़्योंकि बच्चा अगर अजनबी व्यक्ति को जवाब देते डरेगा तो यह उसके लिए नुकसानदायक हो सकता है। अजनबी उसे नुकसान पहुँचा सकता है।

अपना फोन नंबर जरूर याद कराए

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बच्चों को अपना फोन नंबर और घर का पता जरूर याद करवाना चाहिए, क्या पता कब जरूरत पड़ जाए या अगर कोई बात करे तो मम्मी पापा अपने बच्चे के साथ कोई कोड वर्ड बना लें … वो कुछ भी हो सकता है चाहे आपकी मनपसंद चाकलेट या कोई नाम या कोई फिल्म कुछ भी।

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ग्रुप में रहें बच्चे 

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कोशिश ये भी करनी चाहिए कि छोटे बच्चे ज्यादा समय अकेले न रहें। स्कूल में भी हैं तो चार पांच बच्चों का ग्रुप बना लें और घर पर बच्चा है तो तब भी उसे स्मार्ट बनाना है ये नही कि घर पर कोई भी आए वो भाग कर दरवाजा खोल ले।

पेरेंट्स बच्चों से बात करें

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इन सबसे ज्यादा जरुरी ये भी है कि पेरेंट्स बच्चों से बात करें स्कूल से लौटने पर पूछे कि आज क्या क्या किया। सारी बात किसी पुलिस की तरह नही बल्कि बातों बातों में आराम से करनी चाहिए।

बच्चे की भी सुने

आमतौर पर अपनी व्यस्त्ता की वजह से पेरेंट्स बच्चे को सुनते नही वो सोचते है अच्छे बडे नामई गिरामी स्कूल में हैं, अब कोई चिंता नही वो निश्चिंत हैं पर बच्चों से बात करना और बच्चों की सुनना बहुत जरुरी है।

डर न बैठाएं – Incidents eye opener होते हैं

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कई बार स्कूल में कोई धटना हुई तो पैरेंटस बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देते हैं। डरने के बजाय डट कर सामना करना सीखना चाहिए। सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी जरुर देनी चाहिए। इससे बच्चों में बहुत आत्मविश्वास आता है। 

Bodyguard बनिये

गुड टच और बेड टच Good touch Bad touch  के बारे में भी बहुत सोच समझ कर समझाएं। असल में बच्चे बहुत मासूम होते हैं।  

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