छोटे बच्चों के लिए भोजन

छोटे बच्चों के लिए भोजन

एक से दो साल के बच्चे अपने खाने की आदत को शिशुपन से छोड़कर अपने बड़ो की तरह बनना शुरू करते है। वे अपने हाथों से खाने की आदत को सीखते है और फिर जब वे पंद्रह से अठारह महीने के होते है तब अपनी थाली से खुद खाना पसंद करते है। बच्चे साल में तीन से पांच इंच ही बढ़ पाते है। इनकी इस उम्र में बहुत से बदलाव होते है, जैसे कि भोजन व्यवाहर को सिखने से ले कर अनेक प्रकार के खान-पान के स्वाद तक। माता-पिता अपने बच्चे को बोतल से पिलाने की आदत को दूर करते है और दूसरे आहर जो बच्चे की सेहत के लिए अच्छे हो, उनसे परिचय करवाते है। स्तन के दूध से बहुत पोषण उपलब्ध होते है, लेकिन अब यह सही समय है कि अपने बच्चे को वास्तविक खाने का स्वाद कराए :

 

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जो खाना बच्चे के लिए बहु कार्य करता हो 

आप अपने बच्चे के आहर में अनेक पोषण तत्वों को मिला सकते है। आप को ज्यादातर अपने बच्चे की सेहत को लेकर सोचना चाहिए, उनके आहर में घी और अनाज से बनें कुछ पदार्थ जोड़े।

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बच्चे के लिए ड्रिंक बनाए 

अपने बच्चे के आहर में ड्रिंक्स भी जरूरी है। बाहर का जूस ज्यादा न अपनाए, अगर जूस पिलाए तो वो घर का ही बना हो। आप दूध और लस्सी जोड़ सकते है। पानी भी उचित मात्रा में पिलाए।

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फल और सब्जी 

फलों को मेस करके बच्चे को खिलाए। इसी प्रकार उबली हुई सब्जी भी मेस करके खिला सकते है। कच्चे फल-सब्जी भी बच्चे को दे सकते है, पर ध्यान रहे की पीस इतना छोटा भी न हो की वो बच्चे को उलझने का डर हो।

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चीजों को बदलते रहे 

बच्चे के खाने में एकरसता नहीं अपनानी चाहिए  उसे अलग-अलग प्रकार के स्वाद, रंग और आकर दें। जिससे बच्चे का विकास अच्छा हो और बच्चा एक ही प्रकार के खाने से उभे नहीं।

 

खाने की गुणवत्ता पर ध्यान दे न की मात्रा पर 

हमें ये ध्यान रखना होगा की बच्चों जो दे रहे हैं वो पौस्टिक हो न की उनको बहुत सारा खिला दें। बच्चों को थोड़ा-थोड़ा कर के बार-बार खिलाएं। बच्चे बहुत सारा खाना एक साथ पसंद नहीं करते। उनको बार बार खिलाना पड़ता हैं। इस बात का ध्यान रखें की जो बी खिला रहे हैं वो पौस्टिक हो और बच्चों के विटामीन की ज़रूरतो को पूरा करे।

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कम मात्रा में परोसें

छोटे बच्चों को जितनी जल्दी भूख लगती है जल्दी उनका पेट भी भर जाता है। जब उन्हें कोई भी चीज दें तो पहले थोड़ी मात्रा में दें, जब वे पूरा खा लें और दोबारा उसकी मांग करे तो ओर दें। अगर बच्चे के सामने चीज को ज्यादा मात्रा में रखेंगे  तो वह उसकी कदर नहीं करेगा और उसे खाएगा कम और वेस्ट ज्यादा करेगा.

 

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खुद पर कंट्रोल करें

अगर बच्चे में अच्छी आदतें डालनी है तो खुद से शुरुआत करें, जैसे कि नाश्ता, लंच, डीनर टाइम से करें, क्योंकि जब हम टाइम पर खाएगें तो बच्चे भी हमें कॉपी करेगें। इससे उन्हें हेल्दी खाने की आदत भी लगेगी। बच्चे को दिन में कई बार भूख लगती है तो उसे बीच-बीच में भी खाने को दें।

 

स्टोर करें

बच्चों के लिए खाना हमेशा स्टोर कर के रखें।  वो कभी की कुछ बी मागने लगते हैं। अगर हम इस बात का ध्यान रखेंगे तो बच्चों के मांगने पर उन्हें दे पाएंगे और इस से हमें भी अच्छा लगेगा क्योंकी बच्चे अच्छे से खायेंगे। ये हमें इस बात में में भी हेल्पफुल है की बच्चा अलग अलग खाने की चीजों को खा पायेगा।

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